एक ख़त अधूरी महोब्बत के नाम

मेरी अधूरी मोहब्बत,

कहते हैं पहली मोहब्बत और सच्ची मोहब्बत किस्तम वालों को मिलती है, पर शायद ख़ुदा ने मेरे हाथों की लकीरों को इस तौहफे से नवाजा ही नहीं। शायद यही कारण है कि मेरी मुलाकात तो तुमसे हुई पर हमसफ़र न बन पाए। हमारा रिश्ता तकरार से शुरू हुआ, दोस्ती में बदला और फिर मोहब्बत में तब्दील हो गया। पर सुना है बहुत सी दास्तानों की यही कहानी है। हां, दास्तान तो हमारी हसीन थी पर मुकम्मल न हो पाई। आज भी जब लोग मुझसे हमारी अधूरी मोहब्बत की वजह पूछते हैं तो शांत हो जाया करती हूं मैं क्योंकि बिना मेरे सवालों का जवाब दिए और बिना मुझसे मिले तुम छोड़कर चले गए थे। क्या बस इतनी ही अहमियत थी तुम्हारी नज़रों में हमारी मोहब्बत की ? आज भी कई सवाल झिंझोड़ते है मुझे कि आखिर क्या कमी थी मेरी मोहब्बत में ? मैंने तो दुनिया माना था तुम्हें। हर पल, हर लम्हा सिर्फ तुम्हारे बारे में सोचना, तुम्हारी खुशीयों का खयाल रखना यही मकसद था मेरा पर शायद तुम कुछ और चाहते थे। तुम्हारी एक मुस्कान से मेरा दिन प्रारंभ होता था और उसी पर ही अंत। आज भी तुम्हारे साथ बिताए लम्हें मेरी ज़िन्दगी के सबसे खूबसूरत लम्हें हैं।

इस रिश्ते के मुकम्मल न होने का ग़म तो है मुझे पर मैं तुम्हारा शुक्रिया अदा करना चाहती हूं। तुमने मुझे पहली बार मोहब्बत का अहसास कराया, मुझको इस ज़स्बात से रुबरु कराया, इसके लिए तुम्हारा दिल से शुक्रिया। तुमने मुझे बताया कि सिर्फ दो जिस्मों का नहीं बल्कि दो दिलों और दो रूह का रिश्ता है ये इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। हां तनहा छोड़ गए तुम मुझे पर एक झूठे रिश्ते में रह कर रोज़ मरने से अच्छा आज़ाद होना है ये सिखा गए, इस आज़ादी के लिए शुक्रिया। खुद को तुम्हारे काबिल बनाने में मैं इतना मशरूफ हो गई कि पता ही नहीं चला कि कब ख़ुद को खो बैठी और कब ख़ुद को भुला बैठी। ये सबसे बड़ी गलती थी मेरी, ये बताने के लिए शुक्रिया। मुझे फिर से मुझसे मिलाने के लिए शुक्रिया। तुम्हारे जाने के बाद टूट गई थी मैं पर उन तन्हाईओं ने मुझे खुद से प्यार करना सिखा दिया, खुद पर विश्वास रखना सिखा दिया, खुद के लिए मुस्कुराना सीखा दिया, इसके लिए शुक्रिया। अब एक अलग इंसान हूं मैं। अंदर चाहे जितना ग़म हो पर चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रखती हूं क्योंकि समझ आ गया है मुझे कि किसी को परवाह नहीं किसी के गमों की इसलिए उन्हें छुपाए रखना बेहतर है वरना ये दुनिया खेलेंगी उन जस्बातों से, ये समझाने के लिए शुक्रिया।

ख़फ़ा तो आज भी हूं तुमसे पर नफ़रत नहीं करती। आज भी अपनी हर दुआ में तुम्हारी सलामती मांगती हूं और वैसे भी चाहकर भी नफ़रत नहीं कर सकती तुमसे क्योंकि अब इस दिल को कुछ महसूस होता ही नहीं। बस एक आखिरी बार मिलना चाहती हूं तुमसे और गले में बाहें डाल कर शुक्रिया कहना चाहती हूं ताकि जिन्दगी में जब भी पीछे मुड़कर देखूं तुमसे आखिरी बार न मिलने का अफसोस न रह जाए। बस एक आखिरी बार तुम्हारी आंखों में आंखें डालकर अलविदा कहना चाहती हूं।

तुम्हारी ,

कुछ भी नहीं

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Life

Once I asked life,
Who is she,
She just replied,
I’m an illusion but reality too,
I’m a nightmare but sunshine too,
I’m war but peace too,
I’m unpredictable but predictable too,
I’m a dream but actuality too,
I’m hate but love too,
I’m sorrow but happiness too,
I’m a mystery but solution too,
I’m darkness but light too,
I’m a backstabber but companion too,
I’m suspicion but faith too,
I’m cruel but fair too,
I’m a lie but truth too.

-©The_Life_Talks